क्राइम

एफपीओ गठन और कृषि योजनाओं की प्रगति पर डीएम सख्त, फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही पर निलंबन के निर्देश

कलक्ट्रेट सभागार में एफपीओ की क्रियाशीलता, पराली प्रबंधन, गौ आधारित कृषि और डिजिटल क्रॉप सर्वे को लेकर हुई अहम समीक्षा बैठक

सम्भल बहजोई। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रशासन ने एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) के गठन और उनकी सक्रियता पर जोर बढ़ा दिया है। इसी क्रम में आज कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया की अध्यक्षता में एफपीओ के गठन एवं क्रियाशीलता तथा कृषि विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एफपीओ की प्रगति, विभिन्न कृषि योजनाओं और किसानों को लाभ पहुंचाने वाले नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।

खबर विस्तार:
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर एफपीओ का गठन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को सामूहिक रूप से लाभ मिल सके। एफपीओ एसकेजीएस से जुड़े राजवीर सिंह पुत्र मेवाराम, निवासी कोकावास, विकासखण्ड बनियाखेड़ा द्वारा पराली प्रबंधन को लेकर किए जा रहे नवाचार की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि क्लचर एवं बेलर मशीन के माध्यम से धान की पराली को खाद में परिवर्तित किया जा रहा है, जिससे किसानों के खेतों में पराली जलाने की समस्या का समाधान हो रहा है। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए राजवीर सिंह को 23 दिसंबर को भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा ‘चौधरी चरण सिंह किसान सम्मान’ से सम्मानित किया गया। बैठक में शहद उत्पादन के लिए एफपीओ गठन और उन्हें स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने को लेकर भी निर्देश दिए गए। उप कृषि निदेशक डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी ने जानकारी दी कि मूंग एवं उड़द का बीज प्राप्त हो गया है, जिसे गन्ना विभाग के समन्वय से किसानों को वितरित किया जाएगा। इसके अलावा ई-लॉटरी, फार्मर रजिस्ट्री एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति की भी समीक्षा की गई फार्मर रजिस्ट्री की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कड़े निर्देश दिए कि जिन कृषि, राजस्व एवं ग्राम विकास विभाग से जुड़े कर्मचारियों द्वारा सबसे कम प्रगति की गई है, उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने गौ आधारित कृषि को अपनाने पर जोर देते हुए एफपीओ से अपील की कि किसानों को इसके लिए जागरूक किया जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिल सके। वहीं जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि फूलों की खेती करने के इच्छुक किसान उद्यान विभाग में आवेदन कर सकते हैं। जिलाधिकारी ने फूलों की खेती और मत्स्य विभाग की योजनाओं को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट, अपर जिलाधिकारी प्रदीप वर्मा, उप जिलाधिकारी गुन्नौर अवधेश कुमार, डिप्टी कलेक्टर विकास चन्द, एलडीएम ललित राय, जिला गन्ना अधिकारी, समस्त खण्ड विकास अधिकारी, एफपीओ के प्रतिनिधि एवं अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

ब्यूरो रिपोर्ट: कपिल वार्ष्णेय
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