धर्म

श्रीमद् भागवत कथा से गुंजायमान हुआ धनारी क्षेत्र

हनुमान शिव मंदिर संतकुटी श्री पंच आश्रम में पांच दिवसीय कथा का भव्य आयोजन श्रीकृष्ण जन्म लीला पर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

संभल धनारी। धनारी क्षेत्र के पटृटीलालसिंह स्थित हनुमान शिव मंदिर संतकुटी श्री पंच आश्रम में चल रही पांच दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ने पूरे इलाके को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया है। श्री श्री 108 मंडल श्री महंत रामेश्वर गिरी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में दूर-दराज से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। कथा आयोजन में समस्त ग्रामवासियों का सक्रिय सहयोग देखने को मिल रहा है, जिससे यह कार्यक्रम भव्य और ऐतिहासिक रूप ले चुका है।

श्रीकृष्ण जन्म लीला का भावपूर्ण वर्णन

कथा का दिव्य वाणी पाठ श्री महंत रामेश्वर गिरी महाराज के प्रमुख शिष्य एवं प्रख्यात कथावाचक व्यास प्रवेंद्र द्वारा किया जा रहा है। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की जन्म लीला का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया गया। जैसे ही श्रीकृष्ण के अवतरण की कथा सुनाई गई, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते नजर आए और कई की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण चंदौसी से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत माता पार्वती की भव्य झांकी रही। मनमोहक वेशभूषा, सजीव अभिनय और भावनात्मक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। झांकी के माध्यम से धार्मिक कथाओं और आध्यात्मिक संदेशों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

हरि नाम संकीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण

भागवत कथा के दौरान संपूर्ण क्षेत्र हरि नाम संकीर्तन, भक्ति गीतों और धार्मिक जयकारों से गूंजता रहा। कथा स्थल पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां श्रद्धालु तल्लीन होकर कथा श्रवण करते दिखाई दिए। भक्ति संगीत और कथा वाचन ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। कथा आयोजन के समापन पर विधिवत आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजकों ने श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा। इस श्रीमद् भागवत कथा आयोजन ने न केवल क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी सहयोग की भावना को भी मजबूत किया। श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। धनारी क्षेत्र में आयोजित यह श्रीमद् भागवत कथा श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है, जिसने जनमानस को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का कार्य किया है।

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