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क्राइम

गणतंत्र दिवस पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी चूक आरोग्य मंदिरों में नहीं पहुंचा तिरंगा

जुनावई के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में नहीं पहुंचा तिरंगा, तालेबंद केंद्रों ने खोली सरकारी दावों की पोल

जुनावई संभल। 77वें गणतंत्र दिवस पर जब देश का कोना-कोना तिरंगे की शान में रंगा हुआ था, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में राष्ट्रध्वज फहराया जा रहा था और संविधान के प्रति आस्था प्रकट की जा रही थी, उसी वक्त संभल जनपद के जुनावई क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज तस्वीर सामने आई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जुनावई से जुड़े कई आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर न तो तिरंगा फहराया गया, न कोई राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित हुआ और न ही कोई जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी मौके पर मौजूद मिला। हालात यह रहे कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर भी इन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके रहे।

स्थानीय लोगों के अनुसार घौंसली मोहकम, सिरौरिलिया, गढ़ी बिचौला, नगला अजमेरी डांडा, कीरतपुर एवं हुमायूंपुर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर पूरे दिन बंद रहे। सुबह से दोपहर तक इन उपकेंद्रों पर न कोई कर्मचारी दिखाई दिया और न ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। यह नजारा न केवल शासनादेशों की अवहेलना को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीय पर्व की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।

‘हर घर तिरंगा’ के दावों पर सवाल

सरकार एक ओर “हर घर तिरंगा” अभियान के जरिए देशभक्ति का संदेश दे रही है। वहीं दूसरी ओर उन्हीं की सरकारी संस्थाओं पर तिरंगा न फहराया जाना सरकारी दावों की सच्चाई उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि जब सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों तक तिरंगा नहीं पहुंच पाया तो अभियान की जमीनी हकीकत क्या है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी माने जाते हैं। यहीं से ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार, दवाएं, टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं। ऐसे में राष्ट्रीय पर्व पर इन केंद्रों का बंद रहना यह सोचने पर मजबूर करता है कि आम दिनों में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं किस हाल में मिलती होंगी। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सामान्य दिनों में भी केंद्रों पर ताले लटके मिलते हैं।

ग्रामीणों में गुस्सा कार्रवाई की मांग

स्थानीय ग्रामीणों ने इस लापरवाही को लेकर गहरा रोष जताया है। उनका आरोप है कि संबंधित कर्मचारियों ने न केवल अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ा, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को भी नजरअंदाज किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक जिम्मेदारी से पलायन का गंभीर मामला है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को बिना अनुमति के बंद रखा गया था? क्या इसकी जानकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जुनावई के अधिकारियों को थी? और यदि जानकारी थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी कई शंकाओं को जन्म दे रही है।

CMO का बयान लेकिन सवाल बरकरार

इस पूरे मामले में जब संभल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी तरुण पाठक से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस विषय की जानकारी है। उन्होंने कहा कि जिन केंद्रों पर स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती नहीं है वहां ध्वजारोहण नहीं किया गया है। उनके अनुसार लगभग 10–12 ऐसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं जहां स्टाफ की तैनाती नहीं है। हालांकि उनका यह बयान खुद कई सवाल खड़े करता है।

तरुण पाठक CMO सम्भल

स्टाफ नहीं तो ध्वजारोहण क्यों नहीं

यदि किसी केंद्र पर स्थायी स्वास्थ्यकर्मी तैनात नहीं हैं, तो क्या वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराना जरूरी नहीं समझा गया क्या प्रशासन की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि राष्ट्रीय पर्व पर कम से कम तिरंगा फहराया जाए इसी सवाल ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। यह मामला केवल ध्वजारोहण न होने का नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था, जवाबदेही और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का भी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल जुनावई क्षेत्र में यही चर्चा है कि क्या राष्ट्रीय पर्व की इस अनदेखी पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या फिर यह मामला भी सिस्टम की भेंट चढ़ जाएगा।

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