संभल में प्रधान के पिता की नृशंस हत्या का बड़ा फैसला: तीनों दोषियों को उम्रकैद सात साल बाद मिला इंसाफ
रात में घर में घुसकर की गई थी गोली मारकर हत्या अदालत ने कहा सबूत मजबूत गवाह विश्वसनीय

संभल/चन्दौसी। जनपद सम्भल के थाना धनारी क्षेत्र में प्रधान के पिता की सनसनीखेज हत्या के मामले में अदालत ने सात साल बाद ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, चन्दौसी ने वर्ष 2018 के चर्चित हत्याकांड में तीन अभियुक्तों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद पूरे इलाके में हलचल मच गई है और पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। यह वही मामला है जिसने एक समय पूरे क्षेत्र को दहला दिया था। आधी रात को तमंचों के साथ घर में घुसकर बुजुर्ग की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य संदेह से परे हैं और अपराध पूरी तरह सिद्ध होता है।

आधी रात का खौफनाक मंजर घर में घुसकर बरसाई गई गोलियां
अभियोजन के अनुसार 24 अप्रैल 2018 की रात करीब दो बजे गांव जड़वार में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब चार हथियारबंद लोग एक घर में घुस आए। घर में परिवार के सदस्य सो रहे थे। पहले वादी पर जानलेवा फायर किया गया, वह किसी तरह जान बचाकर छिप गया। इसके बाद बुजुर्ग पिता को चारपाई से उठाकर गोली मार दी गई। गोली लगते ही उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घर के बाहर लगी सोलर लाइट की रोशनी में हमलावरों की पहचान साफ हो गई थी। मृतक की पत्नी, पुत्र और पोते ने अदालत में पूरी घटना का आंखों देखा हाल बयान किया।

जांच में खुला राज हथियार भी हुए बरामद
घटना के बाद पुलिस ने तफ्तीश तेज की। अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किए गए तमंचे और कारतूस बरामद किए गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अभियुक्त अवैध हथियारों के साथ खुलेआम घूम रहे थे। इसी आधार पर आर्म्स एक्ट के तहत अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए। पुलिस अधिकारियों और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने अदालत में यह साबित कर दिया कि बरामद हथियार ही हत्या में प्रयुक्त हुए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी गोली लगने से अत्यधिक रक्तस्राव को मौत का कारण बताया गया।

बचाव पक्ष की दलीलें ध्वस्त अदालत ने कहा…..झूठी कहानी
बचाव पक्ष ने आरोपियों को फंसाने की साजिश का दावा किया, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि बचाव पक्ष के गवाह आपसी रिश्तेदार हैं और उनके बयान न केवल विरोधाभासी हैं बल्कि अविश्वसनीय भी हैं। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि कोई पिता अपने ही बेटे के हाथों मारा जाए और परिवार असली हत्यारों को छोड़कर किसी और को फंसा दे, यह तर्क मानने योग्य नहीं है।

उम्रकैद का ऐलान जमानत निरस्त सीधे जेल भेजे गए दोषी
अदालत ने तीनों दोषियों को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा अवैध हथियार रखने के मामलों में भी कठोर कारावास की सजा दी गई। फैसले के तुरंत बाद जिन अभियुक्तों को जमानत मिली हुई थी, उनकी जमानत निरस्त कर दी गई और उन्हें हिरासत में लेकर जिला कारागार मुरादाबाद भेज दिया गया। अदालत परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

अदालत का कड़ा संदेश हिंसा बर्दाश्त नहीं
दण्ड सुनाते समय अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह मामला मृत्युदण्ड की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन आजीवन कारावास पूरी तरह न्यायसंगत है। यह फैसला समाज के लिए एक सख्त संदेश है कि चुनावी रंजिश या आपसी दुश्मनी के नाम पर कानून अपने हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

सात साल बाद न्याय गांव में चर्चा का विषय बना फैसला
इस फैसले के बाद गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोग इसे कानून की जीत और अपराधियों के लिए कड़ा सबक बता रहे हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि देर से ही सही, लेकिन न्याय मिला।




