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क्राइम

संभल हिंसा का अद्रश्य सरगना: दुबई से आग बरसाता रहा शारिक उर्फ साठा

घर से डिब्बे तक कुर्क 59 मुकदमों वाला गैंगस्टर अब भी फरार

फर्जी पासपोर्ट, सोने की तस्करी, ISI कनेक्शन और हथियार फैक्ट्री की साजिश का सनसनीखेज खुलासा

संभल। संभल हिंसा की पटकथा भले ही सड़कों पर लिखी गई हो लेकिन उसकी स्याही दुबई से बहाई गई थी। इस हिंसा का मास्टरमाइंड कुख्यात फरार गैंगस्टर शारिक उर्फ साठा भले ही भारत से हजारों किलोमीटर दूर छिपा हो लेकिन कानून का शिकंजा अब उसके घर तक पहुंच चुका है। बुधवार को कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने उसके पुश्तैनी मकान को कुर्क कर दिया। चारपाई से लेकर टिन के डिब्बे तक जब्त हुए और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। यह कार्रवाई सिर्फ एक मकान की नहीं बल्कि उस अपराधी साम्राज्य के अंत की शुरुआत है जिसने संभल को आग में झोंक दिया था।

सुबह 11 बजे गूंजा एलान थम गईं सांसें

नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला हिंदूपुरा खेड़ा पजाया में बुधवार की सुबह आम नहीं थी।
डुगडुगी की आवाज़ गूंजी
“यह संपत्ति अपराध से अर्जित है। इसे कुर्क किया जाता है।”

नखासा, रायसत्ती, संभल कोतवाली, हयातनगर और AHTU की संयुक्त टीम के 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने इलाके को चारों ओर से घेर लिया। हर गली, हर छत पर पुलिस। पूरा मोहल्ला पुलिस छावनी में बदल चुका था।

चार मंजिला मकान पहली मंजिल पर कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक यह चार मंजिला पुश्तैनी मकान शारिक समेत उसके चार भाइयों का है।
शारिक की हिस्सेदारी पहली मंजिल में थी और वहीं चला कानून का हथौड़ा। कमरे खुले सामान खंगाला गया।
चारपाई, बर्तन, टिन के डिब्बे सब जब्त। अंत में ताला लगा दिया गया। घर नहीं जैसे अपराध की जड़ को सील कर दिया गया।

दुबई में बैठकर संभल जलाया

जांच एजेंसियों का दावा है कि संभल हिंसा की पूरी साजिश दुबई में बैठे शारिक साठा ने रची थी। मोबाइल कॉल मैसेज और गुर्गों के जरिए निर्देश कहां भीड़ जुटेगी कहां पत्थर चलेंगे कहां फायरिंग होगी। 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान अचानक भड़की हिंसा कोई इत्तेफाक नहीं थी यह एक सुनियोजित प्लान था। हिंसा के दौरान पुलिस की गाड़ियां जला दी गईं। गोलीबारी में चार युवकों की मौत हुई। 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। सबसे चौंकाने वाली बात मौके से पाकिस्तान में बने कारतूस बरामद हुए। यहीं से कहानी ने ले लिया अंतरराष्ट्रीय मोड़।

गुर्गे टूटे मास्टरमाइंड बेनकाब

शारिक के तीन खास गुर्गे गुलाम, वारिस और मुल्ला अफरोज पुलिस की गिरफ्त में आए। पूछताछ में कबूलनामा हथियार शारिक के इशारे पर सप्लाई हुए। निर्देश दुबई से आते थे। तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। लेकिन सरगना अब भी फरार है। शारिक ने 18 अगस्त 2020 को हुसैन पुत्र ख्वाजा शारिक हुसैन नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवाया। दिल्ली के बुराड़ी का ऐसा पता जहां वह कभी रहा ही नहीं। सितंबर 2020 में वह दुबई भाग गया और फिर भारत  लौटा नहीं।  उसके खिलाफ 59 मुकदमे दर्ज हैं। लेकिन उसने सिस्टम को धोखा देकर देश छोड़ दिया।

सोने की तस्करी और ISI का साया

पुलिस का दावा है कि शारिक दुबई में बैठकर सोने की तस्करी कर रहा है। ISI से संपर्क में है। कुछ तस्वीरें सामने आई हैं। कार में बैठा शारिक हाथ में सोने के बिस्किट यह सिर्फ गैंगस्टर नहीं यह एक अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क का हिस्सा है।

भारत–नेपाल बॉर्डर पर हथियार फैक्ट्री की साजिश

जांच में खुलासा हुआ कि शारिक की दुबई मे सलीम पिस्टल नाम के तस्कर से मुलाकात हुई थी। दोनों भारत–नेपाल सीमा पर अवैध हथियार फैक्ट्री खोलने की योजना बना रहे थे। सलीम नेपाल में पकड़ा गया लेकिन शारिक अब भी कानून से दूर है।

ट्रक हेल्पर से गैंगस्टर बनने की कहानी

शारिक उर्फ साठा मोहल्ला दीपा सराय संभल का रहने वाला है। इसकी शुरुआत ट्रक और बसों पर हेल्परी से हुई और 1991 मे चीनी से भरा ट्रक गायब किया पहली FIR लिखी गई और फिर शुरू करदी लूट, चोरी, वाहन कटान नतीजा संभल से दिल्ली तक 59 मुकदमे अपराध ही उसका पेशा बन गया।

अपराध की जमीन पर अब कानून का दफ्तर

सबसे बड़ा प्रतीकात्मक वार जिस संपत्ति से शारिक ने अपराध फैलाया अब वहीं बनेगा ATS का दफ्तर। संभल पुलिस की यह तैयारी साफ संदेश है अपराध से बनाई गई इमारतें कानून की चौकी बनेंगी।

अब सवाल सिर्फ एक

रेड कॉर्नर नोटिस की तैयारी है। शिकंजा कस रहा है। क्या दुबई में छिपा मास्टरमाइंड कभी कानून के सामने आएगा या संभल की आग का जवाब अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी बनेगा जवाब आने वाला है। संभल देख रहा है।

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