बिना डॉक्टर के चल रहा था अल्ट्रासाउंड सेंटर, सिटी मजिस्ट्रेट की छापेमारी में बड़ा खुलासा
यूनिक अल्ट्रासाउंड एंड एक्स-रे सेंटर सील, रेफरल कमीशन और अवैध संचालन के मिले पुख्ता साक्ष्य

सम्भल। नगर के सक्सैना हॉस्पिटल के सामने स्थित यूनिक अल्ट्रासाउंड एंड एक्स-रे सेंटर पर मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सिटी मजिस्ट्रेट ने अचानक छापेमारी की। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि सेंटर पर बिना किसी योग्य चिकित्सक की मौजूदगी के अल्ट्रासाउंड किए जा रहे थे। मौके से ऐसे कई साक्ष्य मिले, जिनसे अवैध संचालन की पुष्टि हुई।

छापेमारी के समय सेंटर पर कुल 10 लोग मौजूद पाए गए, जिनमें 4 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल थीं। रिसेप्शन से अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे से संबंधित रजिस्टर बरामद हुए। अल्ट्रासाउंड रजिस्टर के अनुसार 20 जनवरी 2026 को निरीक्षण के समय तक कुल 13 अल्ट्रासाउंड किए जा चुके थे। रजिस्टर में मरीजों के रेफर करने वालों के नाम दर्ज थे और प्रति मरीज 600 रुपये शुल्क के अलावा कुछ नामों के सामने 100 से 350 रुपये तक की अतिरिक्त राशि अंकित थी, जिससे रेफरल कमीशन का संदेह गहरा गया। कंप्यूटर की जांच में “USG Report 1” नामक फोल्डर मिला, जिसमें जनवरी माह की 1 से 20 तारीख तक किए गए अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट सेव मिलीं। हालांकि कंप्यूटर में केवल 11 रिपोर्ट तैयार होना दर्शाया गया, जबकि रजिस्टर में 13 मरीज दर्ज थे। एक महिला मरीज नंदिनी के अल्ट्रासाउंड की इमेज भी कंप्यूटर में मिली, जिस पर यूनिक अल्ट्रासाउंड सेंटर का नाम, दिनांक और समय अंकित था।

मौके पर मौजूद कर्मचारियों से जब पूछा गया कि अल्ट्रासाउंड किस डॉक्टर ने किए, तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जा सका। पूछताछ में सामने आया कि सेंटर का संचालन माजिद और उसके भाई साहिद द्वारा किया जा रहा है। रिसेप्शन पर कार्यरत महिलाओं ने बताया कि जितेंद्र नामक व्यक्ति अल्ट्रासाउंड करता है। इसके अलावा सेंटर से एक डायरी भी बरामद हुई, जिसमें 25 से 30 आशा कार्यकत्रियों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज थे। जांच के दौरान एक आशा कार्यकत्री से फोन पर संपर्क करने पर उसने भी मरीजों को इसी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराने की पुष्टि की। अधिकारियों ने बताया कि लगभग एक माह पूर्व भी इस सेंटर का निरीक्षण किया गया था, उस समय भी कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला था और चेतावनी दी गई थी कि बिना योग्य चिकित्सक के अल्ट्रासाउंड न किए जाएं। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी जारी रही। सेंटर संचालक ने दावा किया कि सेंटर पंजीकृत है और यहां डॉ. हरेंद्र अत्री अधिकृत हैं, लेकिन निरीक्षण के समय डॉक्टर की अनुपस्थिति में 13 अल्ट्रासाउंड किए जाने के साक्ष्य मिले। वैध अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया, परंतु संचालक कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका। मामले को गंभीरता से लेते हुए नोडल अधिकारी (क्वैक्स) को निर्देश दिए गए हैं कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। प्रथम दृष्टया अयोग्य व्यक्तियों द्वारा संचालन पाए जाने पर यूनिक अल्ट्रासाउंड एंड एक्स-रे सेंटर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।




