नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती पर संभल में होगा ब्लैकआउट मॉक ड्रिल
कलेक्ट्रेट सभागार में प्रशासन की बैठक बड़ी तैयारी आपात हालात से निपटने की बनाई गई ठोस रणनीति
जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के निर्देशन में एक उच्चस्तरीय तैयारी

संभल/बहजोई।
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती 23 जनवरी के अवसर पर जनपद संभल में प्रस्तावित ब्लैकआउट मॉक ड्रिल को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार, बहजोई में जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया के निर्देशन में एक उच्चस्तरीय तैयारी बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी प्रदीप वर्मा एवं मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट ने की।बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ आपात स्थिति से निपटने हेतु समन्वित कार्ययोजना तैयार करने पर विस्तृत चर्चा की गई। तय किया गया कि निर्धारित समय पर कलेक्ट्रेट परिसर से मॉक ड्रिल की शुरुआत की जाएगी, ताकि वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास किया जा सके।

सायरन बजते ही होगा ब्लैकआउट, नागरिकों को सिखाई जाएगी सुरक्षा प्रक्रिया
मॉक ड्रिल के दौरान हवाई हमले की चेतावनी के रूप में सायरन बजाया जाएगा। सायरन की आवाज सुनते ही चिन्हित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बंद कर पूर्ण ब्लैकआउट किया जाएगा। इस दौरान आम नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की प्रक्रिया का अभ्यास कराया जाएगा। हवाई हमला समाप्त होने के संकेत के रूप में ‘ऑल क्लियर’ सायरन भी बजाया जाएगा।

घायलों का रेस्क्यू, आग बुझाने और प्राथमिक उपचार का होगा लाइव अभ्यास
इस मॉक ड्रिल में अग्निशमन विभाग, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नागरिक सुरक्षा कोर, पावर कॉरपोरेशन, स्काउट गाइड, एनसीसी वॉलंटियर्स, आपदा मित्र सहित कई विभाग और स्वयंसेवी संगठन भाग लेंगे। ड्रिल के दौरान

-
छोटी आग बुझाने,
-
घायलों को प्राथमिक चिकित्सा देने,
-
गंभीर घायलों को एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाने,
-
ध्वस्त भवनों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने
जैसी महत्वपूर्ण आपदा प्रबंधन प्रक्रियाओं का जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा।
सभी विभागों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
बैठक में सभी विभागों की जिम्मेदारियां तय करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ ए. के. यादव ने तकनीकी पहलुओं पर जानकारी साझा की। प्रशासन का कहना है कि इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, जनसुरक्षा और विभागीय तालमेल को मजबूत करना है, ताकि संकट के समय जान-माल की हानि को न्यूनतम किया जा सके। संभल प्रशासन की यह पहल आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत और सराहनीय कदम मानी जा रही है।





