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बाल विवाह के खिलाफ खड़ी हुई बेटी, बहजोई में हुआ सम्मान

परिवार का साथ छूटा लेकिन हौसला नहीं टूटा सीओ दीपक तिवारी ने पहनाया मेडल

संभल। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाने वाली एक साहसी बेटी ने पूरे समाज के सामने मिसाल पेश की है। अपने ही परिवार के दबाव के बावजूद बाल विवाह से इनकार कर उसे रुकवाने वाली किशोरी उपासना को बुधवार को बहजोई स्थित पुलिस लाइन सभागार में आयोजित बाल अपराध गोष्ठी के दौरान क्षेत्राधिकारी यातायात दीपक तिवारी ने सम्मानित किया। यह सम्मान न केवल उपासना की हिम्मत का प्रतीक बना, बल्कि बाल विवाह विरोधी अभियान को नई ऊर्जा देने वाला क्षण भी रहा।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन की सहयोगी संस्था प्रयत्न के बाल विवाह विरोधी अभियान से प्रेरित होकर किशोरी उपासना ने अपने जीवन का सबसे कठिन लेकिन सबसे मजबूत फैसला लिया। परिवार और सामाजिक दबाव के बावजूद उसने बाल विवाह स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया और प्रशासन व संस्था की मदद से इसे रुकवाया। बुधवार को बहजोई पुलिस लाइन सभागार में आयोजित बाल अपराध गोष्ठी के दौरान क्षेत्राधिकारी दीपक तिवारी ने उपासना को मंच पर बुलाकर मेडल पहनाया और उसके साहस की खुले मंच से सराहना की। इस दौरान प्रयत्न संस्था की ओर से उपासना को किताबें और स्कूल बैग भी भेंट किए गए, ताकि उसकी पढ़ाई और आगे की राह और मजबूत हो सके।

परिवार ने तोड़े रिश्ते फिर भी नहीं झुकी बेटी

इस मामले की सबसे संवेदनशील और चौंकाने वाली बात यह है कि बाल विवाह न करने के फैसले से नाराज होकर उपासना के परिजनों ने फिलहाल उससे संबंध तोड़ लिए हैं। इसके बावजूद उपासना ने न तो अपने फैसले पर पछतावा किया और न ही दबाव में झुकी। उसने अपनी शिक्षा, स्वतंत्रता और अधिकारों को प्राथमिकता दी। बताया जा रहा है कि यह देश का ऐसा पहला मामला है, जहां बेटी की मजबूत इच्छाशक्ति के कारण परिवार ने उससे संबंध तोड़े, फिर भी उसने बाल विवाह स्वीकार नहीं किया। उपासना आज समाज के सामने एक जीवंत उदाहरण बनकर खड़ी है।

प्रशासन और संस्था की अहम भूमिका

प्रयत्न संस्था (जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन की सहयोगी) के संभल प्रभारी गौरीशंकर चौधरी ने इस मामले को जिला प्रोबेशन अधिकारी चंद्रभूषण के संज्ञान में लाया और उपासना को समाज के सामने आदर्श के रूप में प्रस्तुत करने का आग्रह किया। प्रशासन और संस्था के संयुक्त प्रयासों से यह संभव हो सका कि उपासना सुरक्षित रहकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सके।

सीओ दीपक तिवारी बोले— समाज की मशाल हैं ऐसी बेटियां

क्षेत्राधिकारी दीपक तिवारी ने कहा,

“उपासना जैसी बेटियां समाज में परिवर्तन की मशाल हैं। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म करने के लिए जब बेटियां खुद आगे आएंगी, तब बदलाव निश्चित है। प्रयत्न संस्था और प्रशासन के प्रयासों से ऐसी लड़कियों को आगे बढ़ने का मंच मिल रहा है।”

उन्होंने कहा कि उपासना की कहानी अन्य बेटियों को भी अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा देगी।

पूरे जिले के लिए प्रेरणा बनी उपासना

यह घटना न केवल संभल जनपद बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। जहां एक ओर बाल विवाह रोकने के लिए सरकारी और सामाजिक अभियान चल रहे हैं, वहीं उपासना जैसी बेटियां यह साबित कर रही हैं कि बदलाव की सबसे बड़ी ताकत जागरूक युवा पीढ़ी है। इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी चंद्रभूषण, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष गौरव गुप्ता, एएचटी प्रभारी मेघपाल, श्रम प्रवर्तन अधिकारी आजम खान, प्रयत्न संस्था के फील्ड कोऑर्डिनेटर सिराज अहमद, सभी थानों के बाल कल्याण अधिकारी एवं अन्य संबंधित हितधारक उपस्थित रहे। उपासना की कहानी हर उस बेटी के लिए संदेश है। जो अपने अधिकारों शिक्षा और भविष्य के लिए आवाज उठाना चाहती है— हौसला हो तो हालात भी बदलते हैं।

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