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राजनीति

24वें दिन भी नहीं झुका अन्नदाता ठंड, कोहरा और उपेक्षा के बीच सड़कों पर डटे किसान

प्रशासन की चुप्पी से उबाल पर आंदोलन 31 जनवरी की महापंचायत में होगा आर-पार का बड़ा फैसला

सम्भल/धनारी। भारतीय किसान यूनियन असली अराजनीतिक के बैनर तले चल रहा किसान आंदोलन 24वें दिन भी पूरी मजबूती और आक्रोश के साथ जारी है। कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और शीतलहर के बावजूद किसानों के हौसले डिगे नहीं हैं। खुले आसमान के नीचे बैठे अन्नदाता सरकार और प्रशासन से अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। धरना स्थल पर किसानों का साफ कहना है कि देश का पेट भरने वाला किसान आज खुद उपेक्षा, अनदेखी और लापरवाही का शिकार है, लेकिन अब वह चुप बैठने वाला नहीं है। धरना स्थल पर दिन-रात अलाव जल रहे हैं, फिर भी सर्द हवाओं के बीच किसानों का गुस्सा और संघर्ष की आग और तेज होती जा रही है। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस और स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक यह आंदोलन और भी व्यापक रूप लेगा।

5 जनवरी से धरने पर बैठे किसान अब तक नहीं पहुंचा कोई ठोस जवाब

किसानों ने बताया कि 5 जनवरी से वे लगातार प्रशासनिक अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों से मिलकर समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। कई बार ज्ञापन दिए गए, आश्वासन मिले, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण किसानों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। किसान नेताओं का कहना है कि प्रशासन सिर्फ समय निकालने की नीति पर काम कर रहा है, जबकि किसानों की समस्याएं दिन-ब-दिन और गंभीर होती जा रही हैं।

आवारा पशु बने किसानों की सबसे बड़ी मुसीबत

धरना दे रहे किसानों ने बताया कि क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। रात-दिन फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है, इसके बावजूद खेत बर्बाद हो रहे हैं। गेहूं, सरसों और अन्य रबी की फसलें चौपट हो रही हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों की मांग है कि आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, गौशालाओं की संख्या बढ़ाई जाए और उन्हें सुचारु रूप से संचालित किया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।

पशु चिकित्सालय की चारदीवारी और महावानदी का मुद्दा भी गरमाया

किसानों ने पशु चिकित्सालय की चारदीवारी निर्माण की मांग को भी प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना है कि चारदीवारी न होने के कारण अस्पताल की जमीन पर अवैध कब्जे का खतरा बना हुआ है और पशुपालकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इसके साथ ही किसानों ने महावानदी को पुनर्जीवित करने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि नदी के सूखने से खेती, जलस्तर और पर्यावरण तीनों पर बुरा असर पड़ा है। यदि समय रहते इस पर काम नहीं हुआ तो आने वाले समय में हालात और भयावह हो सकते हैं।

धरना स्थल से चेतावनी अब आर-पार की लड़ाई

धरना स्थल पर किसानों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र सकारात्मक और ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो आंदोलन को तहसील, ब्लॉक और जिला स्तर तक फैलाया जाएगा।

किसान नेताओं ने साफ कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन किसानों के सब्र की भी एक सीमा होती है। यदि प्रशासन ने मजबूरी बनाई तो आंदोलन की दिशा और स्वरूप बदल सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

31 जनवरी की महापंचायत पर टिकीं निगाहें

भारतीय किसान यूनियन ने ऐलान किया है कि 31 जनवरी को प्रस्तावित किसान पंचायत में आंदोलन को लेकर बड़ा और निर्णायक फैसला लिया जाएगा। इस पंचायत में आंदोलन की आगामी रणनीति, प्रदर्शन के नए तरीके और प्रशासन के खिलाफ बड़े कदमों पर चर्चा होगी। किसान नेताओं का कहना है कि यह पंचायत आंदोलन के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। पूरे क्षेत्र के किसानों को पंचायत में पहुंचने का आह्वान किया गया है।

एकजुटता बनी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत

धरना स्थल पर ऋषि पाल सिंह, हरपाल, ओमप्रकाश, विजय सिंह, बहादुर सिंह, रामबीर सिंह, कालू सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों की एकजुटता और संगठन की मजबूती ने यह साफ कर दिया है कि यह आंदोलन अब केवल मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों के सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।

अन्नदाता का साफ संदेश हक मिलेगा तभी हटेगा धरना

धरना स्थल से किसानों का साफ और दो टूक संदेश है कि जब तक उनकी मांगों पर अमल नहीं होगा, तब तक न तो धरना खत्म होगा और न ही आंदोलन कमजोर पड़ेगा। अब 31 जनवरी की पंचायत पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हैं, जहां से किसान आंदोलन की अगली और निर्णायक दिशा तय होगी।

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