20 वें दिन भी नहीं टूटा किसानों का हौसला
राजकीय पशुचिकित्सालय रेलवे स्टेशन धनारी पर डटा किसान आंदोलन प्रशासन से सीधी वार्ता की मांग

✦ विभाग खुद आएं नहीं तो ताली-थाली बजाकर जगाया जाएगा: किसान यूनियन…..
✦ महावा नदी के पुनर्जीवन और गोवंश व्यवस्था को लेकर किसानों का बड़ा अल्टीमेटम
धनारी (संभल)। भारतीय किसान यूनियन असली अराजनैतिक द्वारा राजकीय पशुचिकित्सालय रेलवे स्टेशन धनारी पर चलाया जा रहा धरना-आंदोलन आज 20वें दिन में प्रवेश कर गया, लेकिन किसानों का हौसला और संघर्ष अब भी पूरी मजबूती के साथ जारी है। धरनास्थल पर जुटे किसानों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी जायज मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।धरने के दौरान किसानों की समस्याओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जिन विभागों से संबंधित समस्याएं हैं, वे विभाग स्वयं आंदोलन स्थल पर आकर किसानों से वार्ता करें और समाधान प्रस्तुत करें। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि संबंधित विभागों ने अब भी उदासीनता बरती, तो आगामी चरण में ताली-थाली बजाकर प्रशासन को जगाने का आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

महावा नदी हमारी आस्था का केंद्र : ऋषिपाल सिंह यादव
धरने को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन असली अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रमुख सचिव ऋषिपाल सिंह यादव ने कहा कि महावा नदी किसानों की आस्था और क्षेत्र की जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं देशभर में नदियों के पुनर्जीवन की बात कर चुके हैं। जनपद सम्भल के जिलाधिकारी महोदय द्वारा भी महावा नदी के पुनर्जीवन कार्य का उद्घाटन फावड़ा चलाकर किया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश यह कार्य बीच में ही रोक दिया गया, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि यदि महावा नदी का कार्य शीघ्र पुनः शुरू नहीं किया गया, तो किसान यूनियन इस मुद्दे को बड़े आंदोलन का रूप देने के लिए मजबूर होगी।
गोवंश समस्या पर बड़ा मुद्दा
किसानों ने यह भी मांग उठाई कि राजकीय पशुचिकित्सालय की चारदीवारी व खाली भूमि को सहभागिता योजना के अंतर्गत सीधे किसानों को दिया जाए, ताकि निराश्रित गोवंश की समुचित देखभाल की जा सके और किसानों पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके। इसके साथ-साथ किसानों ने क्षेत्र से जुड़ी अन्य लंबित समस्याओं के शीघ्र समाधान की भी पुरजोर मांग की। धरने में बहादुर सिंह यादव, किसान लाल, गजराम सिंह, विजय सिंह, बीरन सिंह, धीरेन्द्र सिंह, हरपाल सिंह, मनमोहन सिंह, चन्द्रभान सिंह, बदन सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे और आंदोलन को समर्थन दिया।



